चुम्मा…चुम्मा….चुम्मा एक चुम्मा से इस गांव का दाम्पत्य जीवन होता है खुशाल

सन 1996 आई फिल्म छोटे सरकार में उदित नारायण का गया गाना चुम्मा…चुम्मा…चुम्मा…एक चुम्मा तू मुझको उधार दई दे और बदले में यूपी बिहार लई ले.. तो सूना ही होगा. मगर बिहार से सटे राज्य झारखण्ड के एक गांव में ऐसी सार्वजनिक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है जिसमे महिला और पुरुष एक दूसरे को लंबे समय तक चुमते है. ये चुम्मा जो जितना लंबा लेता है उसे इनाम भी दिया जाता है. चलिए जानते है इस चुम्मा प्रतियोगिता के बारे में आखिर ये आयोजन क्यों और किस उद्देश्य से आयोजित करता है.

ऐसा पहली बार हुआ

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झारखंड के दुमारियां गाँव में पिछले 37 साल से हर वर्ष ‘दुमारियां मेले’ का आयोजन किया जाता हैं. इस मेले में हर साल दौड़, तीरंदाज, आदिवासी डांस जैसी प्रतियोगिताएं होती रहती हैं. मगर इस वर्ष इस मेले में एक नये खेल को शामिल किया गया. जो देश के संस्कार रीतिरिवाज और परम्परों से बिल्कुल अलग माना जा रहा है. यह पहली बार था जब मेले में ‘चुंबन’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया.

प्रतियोगिता में सिर्फ पति-पत्नी ही लेते है भाग

प्रतियोगिता का आयोजन JMM (झारखण्ड मुक्ति मोर्चा) के MLA नेता ने किया हैं. प्रतियोगिता का उद्देश्य शादीशुदा लोगों के प्यार और रोमांस का जश्न मनाना है. इस प्रतियोगिता के नियम के अनुसार इसमें केवल शादी शुदा जोड़े ही हिस्सा ले सकते हैं. यहाँ शादी शुदा जोड़ो को एक दुसरे को चूमना होता हैं. इसके बाद जो जोड़ा बिना रुके लगातार सबसे अधिक समय तक चुंबन करता रहता हैं वो जीत जाता हैं.

प्रतियोगिता का उद्देश्य

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां के एक स्थानीय नेता का कहना है आजकल पति पत्नी के बीच में तनाव और दूरिय बढ़ती जा रही हैं. तलाक होने के मामले भी अधिक होते जा रहे हैं. ऐसे में इस प्रतियोगिता का उद्देश्य था कि शादीशुदा जोड़े एक दुसरे के और करीब आ जाए और उनके संबंधो में मिठास आ जाए.

आदिवासी प्रजाति में अधिकतर लोग मासूम और अनपढ़ हैं जिसकी वजह से इनकी प्रजाति सोशल रूप से कमजोर पड़ती जा रही हैं. इस चुंबन प्रतियोगिता के द्वारा हम उन्हें समाज के प्रति जागरूक बनाना चाहते हैं. पहले इस तरह के आयोजन छोटी जगहों पर मनाए जाते थे लेकिन इस बार इसे बड़े फुटबॉल मैदान में आयोजित किया गया हैं.

भारत जैसे सांस्कृतिक, रीतिरिवाजों को सदियों से मानाने वाले देश में रोमांस और चुम्बन जैसी चीजो को पर्सनल माना जाता हैं और इसे लोग अक्सर घर की चार दिवारी के अन्दर या चोरी छिपे करना पसंद करते हैं. विदेशो में शायद एक बार आपको लोग बीच सड़क पर चुंबन करते हुए दिख जाए लेकिन भारत में ऐसा ना के बराबर होता हैं. हाल यह हैं कि यहाँ लोग अपनी रोमाटिक लाइफ के बारे में खुल के पब्लिक में बात भी नहीं करते हैं. मगर झारखण्ड की ये सोच शायद देश की संस्कृति और परम्पराओं को दरकिनार कर मॉडर्न सोच के आधुनिक भारत की ओर कदम बढ़ा रहा है. आमतौर पर लम्बी चुंबन प्रतियोगिताएं विदेशो में आयोजित की जाती हैं ऐसे में झारखण्ड के छोटे से गाँव में ऐसा होना सबके लिए चौकाने वाली बात है.

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