राफेल के अलावा भी भारत के पास है खतरनाक विमान, जानिए उनकी भी खासियतें

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इनदिनों देश में लड़ाकू विमान राफेल को लेकर खूब चर्चा है। राफेल विमान सुरक्षा विषय के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दा भी बना हुआ है।

राफेल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के नेताओं में खूब खींचातानी हो रही है। एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोप हो रहे है।

मगर क्या आप जानते है राफेल के अलावा भरतीय सेना के पास पहले से कितने अत्याधुनिक और शक्तिशाली विमान है ? नहीं जानते तो चलिए हम आपको बताते है सेना के सबसे खतरनाक विमानों के बारे जिनके डर से दुश्मन आँख नहीं दिखा सकते।

सुखोई-30-:

रूस कंपनी द्वारा निर्मित सुखोई 30 भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान है| यह विमान सीधे निशाने पर वार करता है|

यह टाईटेनियम धातु का बना होता है और इसमें पायलट रडार के माध्यम से पहले से लक्ष्य का निर्धारित कर सकता है|

सुखोई की खसियत यह कि यह विमान दो इंजनों के बदोलत तीन हजार किलोमीटर दूरी तक जा कर हमला कर सकता है। ये दो हजार 600 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से दुश्मनों पर अटैक करता हैं।

यह विमान हवा में ईन्धन भर सकता है। इस विमान में अलग अलग तरह के बम तथा मिसाइल ले जाने के लिये 12 स्थान है। भविष्य में इसे ब्रह्मोस मिसालइ से लैस किया जायेगा। इसके अतिरिक्त इसमे एक 30 मिलीमीटर की तोप भी लगी है।

अक्टूबर 2009 में भारतीय वायु सेना के बेड़े में करीब 105 सुखोई-30 विमान तैनात थे। इस तरह की कुल 280 विमान हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाये जाने की योजना है।

तेजस-:

तेजस भारत का पहला स्वदेशी लड़ाकू विमान है| जिसका आधिकारिक नाम तेजस 4 मई 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था।

इसे हिंदुस्तान ऐरानाटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल ने लाइट कॉम्बैट ने तैयार किया है| यह चौथी पीढ़ी का विमान है, जो हल्का होने के साथ अपनी रफ्तार से दुश्मन को चकमा देने में माहिर है|

इसकी खास बात ये है कि, इसे वायुसेना की ऑपरेशन जरूरतों के हिसाब से सभी एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस किया गया है।

ये 200 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से आसमान का सीना चीर सकता है। ये 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। 9,500 किलो वजन के साथ उड़ान भर सकता है।

डर्बी और अस्त्र मिसाइल से लैस हो सकता है। लेजर गाइडेड बम से हमला करने में सक्षम। कम ऊंचाई पर उड़कर दुश्मन पर नजदीक से निशाना साध सकता है। इसकी लंबाई 13.20 मीटर है। ये 5,680 किलोग्राम भारी है। इसकी रेंज 3,000 किलोमीटर है।

मिग-29-:

मिग-29 विमान सुखोई के बाद सबसे शक्तिशाली माना जाता है। वायु सेना में इसको बाज के नाम से भी जाना जाता है। वायुसेना नेे कई मिग-29 विमानों को अपग्रेड भी किया गया है|

जिसके बाद बिना अतिरिक्त टैंक के यह विमान 1500किलोमीटर के बजाए अब 2100 किलोमीटर तक जाकर मार कर सकता है।

1999 में करगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के लड़ाकू विमान को 15 हजार फीट की ऊंचाई पर ही खत्म कर देने वाले मिग 29 ने पाकिस्तानी सेना पर जीत दिलाने में काफी मदद की थी।

अपग्रेडेड मिग-29 हवा से हवा, हवा से जमीन और एंटी शिपिंग ऑपरेशन करने में होगी आसानी। ग्लास कॉकपिट, डिजिटल स्क्रीन जैसे अत्याधुनिक तकनीक से लैस है।

मिराज-2000-:

मिराज इस विमान को वज्र नाम दिया गया। यह वायु सेना का प्राइमरी फाइटर प्लेन है। यह विमान दुश्मन के इलाके में लेजर गाइडेड बम से भी हमला करने में सक्षम है।

फ्रांस की डसॉल्ट कंपनी ने वायुसेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों को आधुनिक किया।

अपग्रेडेड मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में नए रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगा है, जिनसे इन विमानों की मारक और टोही क्षमता में भारी इजाफा होगा।

जैगुआर-:

भारतीय वायुसेना में जैगुवार विमान को शमशेर नाम से जाना जाता है. यह दुश्मन के इलाके मे अंदर घुसकर कहीं पर भी हमला करने के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है|

भारत में लगभग 139 जैगुवार हैं| जगुआर के डिजाइन की खासियत यह है कि इसके हाई-विंग लोडिंग डिजाइन की वजह से कम-ऊंचाई पर एक स्थिर उड़ान और जंगी हथियारों को ले जाने में सहूलियत होती है।

यह विमान 1700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। 30 एमएम के दो एडीईएन या डीईएफए गोले।

इसके अतिरिक्त साढ़े चार हजार किलोग्राम वजन तक के हवा से हवा में हमला करने वाले और हवा से जमीन पर हमला करने वाले रॉकेट समेत कई तरह के हथियार इसमें लोड हो सकते हैं।

टोही विमान-:

एक प्रकार का मानव रहित विमान है जिसे सैन्य अभियानों में शत्रु क्षेत्र की टोह लेने एवं आवश्यकता पड़ने पर आक्रमण करने के लिये उपयोग मे लाया जाता है।

यह टोही विमान है, जो एक क्षण में दुश्मन जहाज के बारे में बता देते हैं. इस विमान में हाई फ्रीक्वेंसी वाले रडार लगे होते हैं|

भारत के पास फिलहाल 3 टोही विमान हैं। यह एक प्रकार से ड्रोन है जिसे रिमोट कंट्रोल के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

ग्लोबमास्टर-:

ग्लोबमास्टर मालवाहक जहाजों में से एक है। जो युद्ध के समय भारतीय थल सेना को अग्रिम पंक्ति पर रसद पहुंचाने का काम करता है। ये विमान गोला बारूद्ध से लेकर टैंक तक उतारने में माहिर है।

यह मध्यम दर्जे का ट्रांसपोर्ट विमान है, जब कभी दुश्मन के इलाके सैनिकों को पैराशूट से उतारना होता है तो इस विमान का प्रयोग किया जाता है|

बम गिराने के लिये भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस विमान का इस्तेमाल अन्य विमानों में ईंधन भरने के लिए किया जाता है, इससे सीधे उड़ते विमान में ईंधन भरा जा सकता है|

इस कारण युद्ध के समय लड़ाकू विमान को दोबारा हमला करने के लिए जमीन पर नहीं उतरना पड़ता|

इस एयरक्राफ्ट्र में भारतीय थल, जल अथवा वायुसेना के सैनिकों को मौके पर शस्त्रों के साथ भेजने का काम किया जाता है| इसका आकार काफी बड़ा होता है और इसमें पूरी की पूरी बटालियन आ जाती है|

इसलिये इसका नाम गजराज रखा गया| तमाम मिलिटरी उपकरणों को इस विमान में रखकर भेजने का काम किया जाता है|

ये है भारत के लडाकू विमान के साथ -साथ आपको ये जानकारी देदे कि भारत के पास दुनिया के बेहतरीन फाइटर पायलट भी हैं। ये जाबाज पायलट जब भारत के लड़ाकू विमानों पर उड़ान भरते हैं तो आकाश में भारतीय वायु सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाती है।

राफेल-:

भारत की सुरक्षा में 36 के करीब आधुनिक मिसाइल और हथियार तकनीक से लैस इस फाइटर जेट के बेड़े में राफेल विमान भी शामिल होंगे।

जिनसे भारतीय वायुसेना की ताकत और मज़बूत होगी। राफेल यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है, जो भारतीय वायुसेना की पहली पसंद है|

हर तरह के मिशन में भेजा जा सकता| अत्याधुनिक हथियारों से लैस, प्लेन के साथ मेटेअर मिसाइल भी है। 150 किमी की बियोंड विज़ुअल रेंज मिसाइल, हवा से जमीन पर मार वाली स्कैल्प मिसाइल। स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किमी है।

हथियारों के स्टोरेज के लिए 6 महीने की गारंटी है। अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा और 3700 किमी. तक मारक क्षमतान है। 1 मिनट में 60,000 फ़ुट की ऊंचाई और 4.5 जेनरेशन के ट्विन इंजन से लैस है।

24 हजार 500 किलो उठाकर ले जाने में सक्षम और 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। अफगानिस्तान और लीबिया में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुका है।

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