पकौड़े बेच कर अंबानी ने अपने बिजनेस को किया था खड़ा

इन दिनों अनिल अंबानी काफी मुश्किलों में है। करीब 44 हजार करोड़ के कर्ज में डूबे अनिल की कंपनी दिवालिया होने की कगार पर है। अपने दौर में रिलायंस कंपनी को उचाईयों के शिखर पर पहुंचाने वाले धीरुभाई अंबानी इसकी शुरुआत पकौड़े बेचकर किया था। कई मुश्किलों के बावजूद काफी कम समय में 80 के दशक में अंबानी की कुल राशि को एक बिलियन रुपयों तक आँका गया था। आगे भी कंपनी तरक्की करती रही। तो आईये जानते है रिलायंस कंपनी के और उनके संस्थापक धीरूभाई अंबानी की खास बातें….

एक चिथड़े से धनी व्यावसायिक टाइकून बनने अंबानी

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धीरजलाल हीरालाल अंबानी जिन्हें धीरुभाई भी कहा जाता है। इनकी कहानी एक चिथड़े से धनी व्यावसायिक टाइकून बनने की है। धीरुभाई का जन्म 28 दिसंबर, 1933 को जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गांव, गुजरात में हुआ। इनके माता-पिता हिराचंद गोर्धनभाई अंबानी और जमनाबेन बेहद गरीब थे। कहा जाता है कि धीरुभाई अंबानी ने अपना व्यवसाय गिरनार की पहाड़ियों पर तीर्थयात्रियों को पकौड़े बेच कर किया था। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था, इसलिए धीरूभाई अंबानी केवल हाईस्‍कूल तक की पढ़ाई पूरी कर पाए और इसके बाद उन्होंने छोटे मोटे काम करना शुरू कर दिया।

परदेश में ही देखा था बड़ा आदमी बनने का सपना

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जब उनकी उम्र 17 साल थी  पैसे कमाने के लिए वो साल 1949 में अपने भाई रमणिकलाल के पास यमन चले गए. जहां उन्हें एक पेट्रोल पंप पर 300 रुपये प्रति माह सैलरी की नौकरी मिल गई. कंपनी का नाम था ‘ए. बेस्सी एंड कंपनी’. कंपनी ने धीरूभाई के काम को देखते हुए उन्हें फिलिंग स्टेशन में मैनेजर बना दिया गया। कुछ साल यहां नौकरी करने के बाद धीरूभाई साल 1954 में देश वापस चले आए। यमन में रहते हुए ही धीरूभाई ने बड़ा आदमी बनने का सपना देखा था।

मात्र 500 रुपयों के साथ पहुंचे मुंबई, खोला कंपनी का पहला ऑफिस-:

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घर लौटने के बाद 500 रुपये लेकर मुंबई के लिए रवाना हो गए। मामूली पूंजी के साथ रिलायंस वाणिज्यिक निगम की शुरुआत की। जिसका पहला व्यवसाय पोलियस्टर के सूत का आयात और मसालों का निर्यात करना था। वे अपने दुसरे चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी जो उनके साथ ही यमन में रहा करते थे, के साथ साझेदारी में व्यवसाय शुरू की।

हालांकि ये साझेदारी 1955 में खत्म हो गयी। कंपनी का पहला ऑफिस मुंबई में मस्जिद बन्दर के नर्सिनाथ सड़क पर खोला गया। जहां एक टेलीफोन, एक मेज़ और तीन कुर्सियों के साथ एक 350 वर्ग फुट का कमरा था। सन 1980 तक अंबानी की कुल राशि एक बिलियन रुपयों तक पहुंच गयी। धीरूभाई का विवाह किलाबेन के साथ हुआ था और उनको दो बेटे हुए। मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी। दो बेटियां भी हुई नीना कोठारी और दीप्ति सल्गाओकर हुई।

बड़े बेटे मुकेश अम्बानी ने 1981 में रिलायंस में काम संभाला और रिलायंस के पुराने ढर्रे के टेक्सटाइल कारोबार को पॉलिएस्टर फाइबर और फिर पेट्रोकेमिकल में आगे बढाया. इस प्रक्रिया में उन्होंने 60 नयी, विश्व स्तर की, विभिन्न तकनीकों से युक्त निर्माण सुविधाओं की रचना को निर्देशित किया, इस से रिलायंस की जो उत्पादन क्षमता 10 लाख टन प्रति वर्ष भी नहीं थी वह एक करोड़ 20 लाख टन प्रतिवर्ष हो गयी।

एक बड़े सदमे के बाद धीरुभाई अंबानी को मुंबई के ब्रेच कैंडी अस्पताल में 24 जून, 2002 को भर्ती किया गया। डॉक्टरों की एक समूह उनकी जान बचाने में कामयाब न हो सके। 6 जुलाई 2002 को सिर की शिरा फट जाने के कारण उनका मुंबई के एक अस्पताल में देहांत हो गया था।

बेटों ने संभाली कंपनी की कमान और हो गए अलग-:

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मुकेश अंबानी ने भारत की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में से एक रिलायंस कम्युनिकेशंस (पूर्व में रिलायंस इंफोकॉम) लिमिटेड को स्थापित किया। हालांकि, दोनों भाइयों में अलगाव होने के बाद रिलायंस इंफोकॉम अनिल धीरूभाई अंबानी समूह में चली गयी। अगर दोनों भाई अलग नहीं हुए होते और मुकेश प्रेजिडेंट बने रहते तो उनकी कुल संपती 100 बिलियन डॉलर के पार होती और वे धरती पर सबसे ज़्यादा अमीर आदमी होते। मगर अफसोस आज अनिल अंबानी की कंपनी करोड़ों रुपयों के कर्ज तले दब चुकी है अब हालात ऐसे है कि यदि कर्ज नहीं चुकाया जाता तो अनिल को जेल भी हो सकती है।

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