भारत का एक ऐसा पहलवान जिसको कोई चित्त ना कर पाया


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बड़े से बड़े पहलवानों को चुनौती देकर दुनियाभर में मशहूर गामा पहलवान का नाम लोक-कथा की तरह देश के कोने कोने में प्रसिद्ध है।

अपने से बड़े कद और भारी भरकम वजन वालों को धूल चटाने वाले के चाहने वालों में मार्शल आर्ट के बेताजबादशाह ब्रूस ली भी थे।

जो गामा पहलवान के एक्सरसाइज से ज्यादा प्रभावित थे। तो चलिए जानते है गामा पहलवान की कुछ खास बातें।

गामा का असली नाम गामा पहलवान नहीं-:
गामा पहलवान का असली नाम ग़ुलाम मुहम्मद बक्श था। गामा उनका स्टेज का नाम था। गामा का जन्म 22 मई 1878 को अमृतसर में हुआ था। हालांकि इनके जन्म स्थान और तारीख को लेकर मतभेत है।

कुछ का मानना है कि गामा का जन्म सन 1889 में वे मध्य प्रदेश के दतिया (होलीपुरा) में हुआ था।गामा के पिता का नाम मोहम्मद अजीज बख्श था जो एक पहलवान थे। गामा का एक भाई इमाम बख्श है जो एक पहलवान है।

गामा का डंबल उठा पाना आम आदमी के बस की बात नहीं-:
गामा को रुस्तम-ए-हिंद, रुस्तम-ए-जमाना, द ग्रेट गामा जैसे उपनाम से भी जाना जाता था। गामा ने 10 साल की उम्र में ही पहलवानी शुरू कर दी थी।

जोधपुर में पहलवानी का टूर्नामेंट हुआ, जिसमें देश भर से हजारों पहलवान भाग लेने पहुंचे थे। इसमें गामा पहलवान ने भी हिस्सा लिया था।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दिन में 5000 बैठक और 1000 से ज्यादा दंड लगाना गामा पहलवान की शेड्यूल में शुमार था। उनके बारे में कहा जाता है कि वे 80 किलो वजनी हंसली के साथ उठक-बैठक लगाते थे।

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उनका जो डंबल है, वो किसी आम आदमी के उठाने के बस की बात नहीं है। वो भारी भरकम पत्थर के बने डंबल का इस्तेमाल करते थे।

बता दें कि दतिया के म्यूजियम में आज भी इन्हें संभाल कर रखा गया है।

जब विदेशी पहलवानों को ललकारा-:
सन 1910 तक उन्होंने सभी धाकड़ भारतीय पहलवानों को धूल चटा दी थी। भारत में सबको हराने के बाद गामा ने पश्चिमी देशों के पहलवानों से दो-दो हाथ करने के लिए इंग्लैंड का रुख़ किया लेकिन कम वज़न होने के कारण उन्हें फ़ौरन एंट्री नहीं मिली।

इससे नाराज़ होकर गामा ने घोषणा कर डाली कि वह किसी भी तीन पहलवानों को तीस मिनट में पटख़नी दे सकते हैं। काफी लंबे समय तक किसी ने इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया।

गामा ने हेवीवैट रेस्लर स्टेनिस्लॉव ज़ीबायस्को और फ़्रैंक गोच को चुनौती दी कि या तो वह उनको धूल चटा देंगे या फिर ईनाम का पैसा उन्हें देकर घर चले जाएंगे।

गामा की चुनौती को स्वीकार करने वाला पहला पेशेवर पहलवान था अमेरिका बेंजामिन रॉलर।

मुकाबला हुआ और गामा ने रॉलर को सिर्फ एक मिनट 40 सैकंड में चित कर दिया। दूसरी बार उन्होंने 9 मिनट दस सैकंड में रॉलर को हराया। दूसरे दिन गामा ने 12 पहलवानों को हराया और इस तरह उन्हें ऑफिशियल टूर्नामेंट में एंट्री मिल गई।

गामा ने अपनी लाइफ में देश के साथ-साथ विदेशों के 50 नामी पहलवानों से कुश्ती लड़ी और सभी जीतीं। वैसे तो गामा पहलवान कई देशों में अपनी कुश्ती का झंडा गाड़ दिया था।

पांच दशक लंबा उनका करियर सभी के लिए एक मिसाल है। खास बात यह है कि इन 50 सालों में उन्होंने एक भी मुकाबला नहीं हारा।

आखरी कुश्ती के बाद पहलवानी को कह दिया अलविदा-:
सन 1895 में गामा का सामना देश के सबसे बड़े पहलवान रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से हुआ।

रहीम की लंबाई 6 फुट 9 इंच थी, जबकि गामा सिर्फ 5 फुट 7 इंच के थे लेकिन उन्हें जरा भी डर नहीं लगा। गामा ने रहीम से बराबर की कुश्ती लड़ी और आखिरकार मैच निरस्त गया।

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सन 1911 में गामा का सामना फिर रहीम बक्श से हुआ। इस बार रहीम को गामा ने चित कर दिया। इसके बाद, 1927 में गामा ने आखिरी फाइट लड़ी।

उन्होंने स्वीडन के पहलवान जेस पीटरसन को हराकर खामोशी से इस खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

राजा रखते गामा के खाने-पीने का ख्याल-:
बताया जाता है कि उनकी खुराक का खर्च तत्कालीन राजा भवानी सिंह द्वारा उठाया जाता था। गामा पहलवान आधा किलोग्राम घी हर रोज खाने के लिए इस्तेमाल किया करते थे।

यह उनके सामान्य भोजन में शामिल होता था। नाश्ते में 4 लीटर बादाम-दूध पीते और इसके बाद चार दर्जन अंडे और 2 किलो फल खाया करते थे।

दोपहर के भोजन में वे तीन किलोग्राम चिकन या मांस और 50 रोटी खाने के लिए इस्तेमाल करते थे। इसके बाद वे भोजन को पचाने के लिए 2 लीटर फलों का रस पीया करते थे।

शाम के जलपान के लिए वह पीने के लिए तीन लीटर दूध और वहीं चार दर्जन अंडे और 2 किलो फल खाया करते थे।

रात के भोजन में तीन किलोग्राम चिकन, एक किलोग्राम सूप और 50 रोटी अपने खाने में शामिल किया करते थे। दोपहर के और रात के भोजन के साथ 750 ग्राम मक्खन खाने के लिए इस्तेमाल करते थे।

भारी व्यायाम पूरा करने के बाद, गामा पहलवान अपने शरीर को ठंडा करने के लिए दो लीटर ठंडाई पीते थे।

ब्रूस ली सीखा था गामा दंड-बैठक -:
आपको शायद ये जानकर हैरानी होगी कि ब्रूस ली खुद गामा पहलवान से बेहद प्रभावित थे और उनसे ही उन्होंने बॉडी बनाना सीखी थी।

ब्रूस ली लेखों के ज़रिये गामा पहलवान की कसरत पर नज़र रखते थे औऱ फिर खुद भी उसका अभ्यास करते थे।

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ब्रूस ली ने दंड-बैठक लगाना भी गामा को देखकर सीखा था। ली ने गामा से एक ऐसी तकनीक सीखी थी जिसे पुश अप्स की नई तकनीक बताया गया था। इसके अलावा ली ने ग्रेट गामा से और भी कई चीजों में प्रेरणा पाते थे।

दिल की बीमारी से हारी दुनिया-:

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सन 1947 में भारत-पकिस्तान बटवारे के बाद गामा पकिस्तान छाले गए।

बड़े-बड़े पहलवानों को रिंग में हरा देने वाले पहलवान गामा को दिल की बीमारी ने हराया था। गामा ने अपने 82वें जन्मदिन के ठीक एक दिन बाद 23 मई, 1960 को लाहौर में इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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