एक ऐसा चाय वाला जो असल जिंदगी में चाय बेचकर करता है समाज सेवा

हम सभी ने सूना है भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। आज वो देश की सेवा कर रहे है। मगर ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो उन्हें शायद ही चाय बेचते हुए देखा होगा। बहराल जो भी हो लेकिन उड़ीसा राज्य में एक ऐसा भी शख्स है जो असल जिंदगी में चाय बेचकर समाज सेवा कर रहा है। जिनका सपना तो टीचर बनने का मगर तक़दीर को कुछ और ही मंजूर था। तो आइए जानते डी प्रकाश राव की कहानी…..!

अपनी आमदनी का आधा पैसा समाज सेवा में खर्च

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ओडिशा की राजधानी से करीब 30 किलोमीटर दूर बसे शहर कटक में सड़क के किनारे बसी एक झोपड़पट्टी में 61 साल के देवरपल्ली प्रकाश राव’ रहते हैं। जो 50 सालों से चाय बेचने का काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें चाय बेचकर दिनभर में जो 500 से 600 रुपये मिलता है उसका बड़ा हिस्सा समाजसेवा में लगा देते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 को अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 44वें संस्करण में प्रकाश का की जमकर तारीफ की। जिसके चलते कटक और आसपास के इलाकों के लोग उनका काफी सम्मान करते हैं। प्रकाश राव ने 2019 का पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त किया इसके ट्रू लीजेंड अवॉर्ड्स 2016 के अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके हैं।

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गरीब बच्चों के लिए खोला स्कूल

डी.प्रकाश राव कटक के बख्शीबाजार में एक स्लम में रहते हैं। प्रकाश बचपन में पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन जब वो ग्यारहवीं क्लास में थे तो उनके पिता को गंभीर बीमारी हो गई। इसके कारण पढ़ाई छोड़कर वो दुकान चलाने लगे। भले ही वे अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर सके। बावजूद इसके प्रकाश आठ भाषाओं- तेलुगु, ओडिया, तमिल, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, हिंदी और अंग्रेजी में निपुण हैं। डी प्रकाश राव पिछले 50 साल से चाय का बिजनेस कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देखा कि यहां झुग्गी में रहने वाले लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। ऐसे में प्रकाश ने अपने पैसे से साल 2000 में स्कूल खोल दिया।

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जिसका नाम आशा-आश्वासन स्कूल रखा। स्कूल में आने वाले भुवनेश्वर की मलिन बस्तियों के 70 से अधिक बच्चों को पढ़ा-लिखाकर उनके जीवन स्तर को सुधार रहे है। बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन की पूरी व्यवस्था करते हैं। यह स्कूल बस तीसरी क्लास तक ही है। तीसरी क्लास पास करने वाले बच्चों को प्रकाश सरकारी स्कूल में दाखिल करा देते हैं। उनके स्कूल के बच्चे पढ़ाई के अलावा खेलों की दुनिया में भी नाम कमा रहे हैं। दिसम्बर 2015 में मानवाधिकार दिवस पर ओडिशा ह्यूमन राइट कमीशन ने प्रकाश को सम्मानित किया था।

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उनके इस स्कूल के बारे में कुछ डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी हैं। स्कूल चलाने के अलावा प्रकाश राव निकट के एससीबी अस्पताल में सरकार की मदद से एक सहायता केंद्र भी चलाते हैं। इस सहायता केंद्र से वो मरीजों को दूध, गर्म पानी, आइस क्यूब और अन्य जरूरत की चीजें उपलब्ध करवाते हैं। बीते 40 साल से वह लगातार रक्तदान भी करते आ रहे हैं।

 

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