एक ऐसा राष्ट्रपति जो शराब और सिगरेट न पीने वालों की चाहता है मौत !

भारत के ऐसे कई नेताओं के बारे में आपने सूना होगा जो अक्सर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहते है. कई बार तो हालात ऐसे बन जाते है कि पद से त्याग पत्र देने की नौबत भी आ जाती है. मगर हम आज आपको एक ऐसे नेता के बारे में बतायेंगे जो कई विवादित बयान देने के बावजूद लोकप्रिय है.

चेक गणराज्य के राष्ट्रपति का रवैया 

politico.eu

बता दें कि इन दिनों यूरोपीय देश चेक गणराज्य चुनावी माहोल है. जिसमे 73 वर्ष के राष्ट्रपति मिलोश ज़ेमन की लोकप्रियता राजनीतिक मैदान में कसौटी पर हैं. इनदिनों हो रहे राष्ट्रपति चुनावों के पहले दौर को ज़ेमन के लिए जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है. ज़ेमन अर्से से तमाम ‘विवादित बयानों’ की वजह से चर्चा में रहे हैं. उनकी राजनीति ने देश को उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच बांट दिया है.

मिलोश ज़ेमन के विवादित बोल 

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post-gazette.com

एक बार तो उन्होंने कहा था कि वो “तमाम शाकाहारियों और शराब से दूर रहने वालों की मौत चाहते हैं”. उन्होंने पत्रकारों और पर्यावरण के लिए काम करने वाले समूहों के ख़िलाफ जंग का ऐलान करते हुए कहा था कि वो “उनके साथ मध्ययुगीन अंदाज़ में पेश आएंगे. उन्हें जलाएंगे, उन पर पेशाब करेंगे और उन पर नमक छिड़केंगे.”

सांप्रदायिक बयान 

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media.breitbart.com

ज़ेमन मार्च 2013 से सत्ता में हैं. वो साल 1990 से चेक सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं. ज़ेमन जिस धरातल पर खड़े हैं, वो प्रवासियों के ख़िलाफ आक्रामक बयानबाज़ी और अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों की उपेक्षा के जरिए तैयार हुआ है. ज़ेमन अपने देश को लगातार आगाह करते रहे हैं कि वो जिहादी हमलों का शिकार हो सकते हैं. चेक गणराज्य की कुल आबादी एक करोड़ पांच लाख है. इनमें से करीब 35 सौ मुसलमान हैं. साल 2015 में उन्होंने साउथ मोराविया के लोगों को चेतावनी दी थी कि वो मुसलमान प्रवासियों के हमले के लिए तैयार रहें.
मुस्लिम जगत से ‘ख़तरा’ राष्ट्रपति के तौर पर ज़ेमन के कार्यकाल का मुख्य आधार रहा है. जिन्हें वो ‘सभ्यता विरोधी’ बताते रहे हैं.

हो चुकी है इस्तीफे की मांग 

पहली बार वोट देने जा रहीं एक महिला का कहना है हैं कि वो अपने देश की दिशा में बदलाव देखना चाहती हैं. वो कहती हैं, “मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ज़ेमन को जिस तरह देश का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, वो वैसे नहीं कर रहे हैं. कई बार वो ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे वो राष्ट्रपति न हों.” अक्टूबर 2017 में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति ज़ेमन के इस्तीफे की मांग की थी.

श्रोत- बीबीसी 

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