एक ऐसा देश जहां धर्म, जाती, रंग भेदभाव के लिए जगह नहीं

पूरी दुनिया में धर्म, जाती, लिंग, रंगभेद जैसी भेदभाव की भावना लोगों की मानसिक में है . मगर एक ऐसा भी देश है जहां इन सब चीजों से हटके लोगों की सोच है. इस देश की स्थापना हालही में की गयी. जिसे कुछ दोस्तों ने मिलकर की है. जो यहां के खुद एक नागरिक है.

करीब 100 वर्ग मीटर फैले इस देश का नाम ‘किंगडम ऑफ एंक्लावा’ जिसकी स्थापना यूरोप में कुछ लोगों ने की है. स्लोवेनिया और क्रोएशिया देशों की सीमा पर कुछ लोगों एक स्वयंभू देश का निर्माण किया. हालही में पिछले हफ्ते यहां 800 एंक्लावा नागरिकों ने देश के पहले वर्चुअल चुनाव कराकर वोट भी दे दिया और मंत्री भी चुन लिए गए.

प्यॉत्र वारजेंकीविज ने किया है देश का  निर्माण

इस जगह को देश में तब्दील करने का कारनामा किया है प्यॉत्र वारजेंकीविज है. प्यॉत्र और उनके कुछ दोस्तों को जब पता चला कि स्लोवीनिया देश के मेटलिका शहर के पास और क्रोएश्या की राजधानी जागरेब से करीब 50 किलोमीटर दूर एक ऐसी जगह है जिस पर किसी का अधिकार नहीं है, तो उन्होंने इस जगह को एक देश बनाने का फैसला कर लिया.

दरअसल, 1991 में यूगोस्लाविया के विघटन के बाद सात राज्य बनाए गए थे. इस दौरान कई ऐसे सीमा क्षेत्र थे जो विवादित हो गए और उन्हें नो मैंस लैंड घोषित कर दिया गया था. प्यॉत्र और उनके कुछ दोस्तों ने इनमें से एक जगह को देश बनाने का फैसला कर लिया.

हर कोई रहे यहां, मुफ्त में हो पढ़ाई-लिखाई बिना टैक्स की हो कमाई 

प्यॉत्र का कहना है कि इस देश के दरवाजे दुनिया के हर नागरिक के लिए खुले हैं. उन्होंने कहा, ‘हमारा मकसद एक ऐसा देश बनाने से है, जिसमें रंग, जाति, धर्म, राष्ट्रीयता जैसा कोई भेदभाव न हो. यहां हर कोई रह सके, अपनी बात रख सके, मुफ्त पढ़ सके और बिना टैक्स दिए पैसे कमा सके. दिलचस्प बाद ये कि इस देश ने https://ecs.enclava.org/index.php वेबसाईट के माध्यम से लोगों को इस देश का नागरिक भी बनाना शुरू कर दिया है.

पांच भाषाओं को मान्यता

बता दें कि इस देश में पांच भाषाओं को मान्यता दी गई है, जिसमें चीनी भी शामिल है. यहां का संविधान भी लिखा जा रहा है और इलेक्ट्रॉनिक आईडी पेपर्स भी तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि, अभी यह देश सिर्फ ऑनलाइन ही उपलब्ध है और इसके अस्तित्व को किसी अंतरराष्ट्रीय बॉडी ने मान्यता नहीं दी है.

श्रोत-दैनिक भाष्कर

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