एक ऐसा देश जहां नहीं है जेल और ना ही कोई कैदी

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दुनिया भर में जितने अपराध और गैर-क़ानूनी काम है उससे कही ज्यादा इसे करने लोग है। लगभग सभी देशों में अपराधियों के सुधार के लिए कारागार यानी जेल होते है। भारत जैसे देश में कारागार का उल्लेख कई पौराणिक कथाओं में भी है।

इस लेख में आप जानेंगे एक ऐसे यूरोपी देश के बारे जहां की जेलों में अब कोई अपराधी नहीं है। जहां खानापूर्ति के लिए दूसरे देश से अपराधियों को इस जेल में लाया जाता है।

सबसे ज्यादा थे कैदी

यूरोप अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर है। जहां एक ओर भारत, ब्रिटेन और दूसरे देशों की जेलों में क़ैदियों की संख्या बढ़ने की वजह से जेल की व्यवस्था ख़राब हो रही है।

वहीं यूरोप महाद्वीप के नीदरलैंड देश में अपराध और गैर-क़ानूनी काम करने वालों की कमी कारण जेलों में बंद करने के लिए कैदी ही नहीं है।

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लिहाजा जेल को बंद करने का फैसला लिया गया है। हम बात कर रहे हैं नीदरलैंड्स की। एक वक्त था जब नीदरलैंड की जेलों में बड़े पैमाने पर क़ैदी थे और यूरोप में जेल जाने वालों की सबसे बड़ी तादाद नीदरलैंड में ही थी। नीदरलैंड की आबादी करीब 1 करोड़ 71 लाख है।

ड्रग्स माफियाओं का अड्डा था नीदरलैंड

वैसे तो नीदरलैंड में कई तरह के अपराध बड़े पैमाने पर हुआ करते थे। मगर इनमे से सबसे ज्यादा ड्रग्स का कारोबार ज्यादा था। साल 2005 में नीदरलैंड में बड़े पैमाने पर ड्रग माफियाओं के पकड़े जाने की वजह से क़ैदियों की संख्या में खूब बढ़ोत्तरी देखी गई थी।

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ऐसे जघन्य अपराध के प्रति नीदरलैंड पुलिस की प्राथमिकता के चलते नीदरलैंड में साल 2005 से लेकर पिछले साल तक क़ैदियों की संख्या 14,468 से घटकर 8,245 पर आ गई है.

मतलब वहां क़ैदियों की संख्या में 43 फ़ीसदी कमी आई है। पुलिस अब ड्रग्स पर नहीं, बल्कि मानव तस्करी और चरमपंथ पर अपना ध्यान लगा रही है।

कैसे हुआ संभव

नीदरलैंड में यह बदलाव कैसे संभव हो पाया. इसकी एक बड़ी वजह क़ैदियों को सुधारने को लेकर किए गए प्रयास हैं। लेकिन नीदरलैंड में अपराध कम करने में एकमात्र यही वजह नहीं है।

नीदरलैंड में जज अक्सर क़ैदियों को जेल की सज़ा देने के बजाय समाजसेवा और जुर्माना जैसी सज़ाएं देते हैं।

यहां उन्हीं क़ैदियों को जेल भेजा जाता है, जिनसे इस बात का ख़तरा रहता है कि वो बाहर जाकर ख़तरनाक साबित होंगे।

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कभी-कभी बेहतर यही होता है कि लोग अपने परिवार और अपने काम-धंधों को करते हुए ही दूसरे तरीकों से सज़ा भुगते।

यहां कम समय के लिए जेल की सज़ा होती है और अपराध दर भी कम हो रहा है। पिछले आठ सालों में अपराध दर में यहां 25 फ़ीसदी की गिरावट आई है।

बंद हो रहे जेलों में खोले जाएंगे स्किल सेंटर

नीदरलैंड्स की सरकार के मुताबिक आने वाले 5 सालों में अपराध में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आएगी और जेल को बंद कर दिया जाएगा। साल 2013 में भी यहां की 19 जेलों को बंद कर दिया गया था।

साल 2004 से ही कानून प्रवर्तन कराने वाले अधिकारियों की कार्रवाई की वजह से अपराधों में गिरावट आने लगी थी।

इस तरह से देखा जाए, तो नीदरलैंड्स सबसे सुरक्षित देशों में से एक है। सरकार ने 700 लोगों को दूसरे विभाग में तबादला करने का नोटिस दिया है। वहीं, 1300 कर्मचारियों के लिए नौकरी ढूंढी जा रही है।

साल 2016 में एम्स्टर्डम और बिजल्मर्बज की जेल बंद हो चुकी हैं। यहां करीब एक हजार शरणार्थियों को रखा गया है और यहां स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोला गया है। जेलों को नए स्टार्टअप, स्कूल और कॉफी की दुकानों में बदला जा रहा है।

भारतीय जेलों में कैदियों के हालात

भारत के जेलों में करीब साढ़े तीन लाख क़ैदियों को रखने की व्यवस्था है, लेकिन इन जेलों में फिलहाल करीब सवा चार लाख क़ैदी रह रहे हैं। इसका मतलब है कि यहां की जेलों में क्षमता से 114 फ़ीसदी ज़्यादा क़ैदी क़ैद है।

वहीं भारत के कुछ राज्यों की जेलों के बारे में बात करें, तो दादर और नागर हवेली में सबसे ज़्यादा 277 फ़ीसदी और उसके बाद छत्तीसगढ़ की जेल में 234 फ़ीसदी ज़्यादा क़ैदी रह रहे हैं।

दिल्ली की जेलों में क्षमता से 227 फ़ीसदी ज़्यादा क़ैदी रह रहे हैं।

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