छठ पर्व पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य का महत्व !

प्रत्येक वर्ष दीपावली के छठे दिन एक मात्र सूर्य को समर्पित छठ पूजा भारत भर में धूम-धाम से बनाया जाता है. इस पर्व पर निर्जला व्रती महिलाएं अस्त हो रहे और उदय हो रहे सूर्य भगवान को अर्घ्य देती है. उगते सूरज को तो आप रोज ही जल चढ़ाते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि छठ में डूबते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है… इसका क्या लाभ होता है और कैसे लोगों को डूबते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए… जानिये…!

sun jal arpan kuchhnaya
उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रतों और त्यौहारों में है. लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा आमतौर पर केवल छठ व्रत में है. धर्म के साथ-साथ विज्ञान से भी जुड़ा है छठ व्रत और पूजा का रिश्ता. कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी को क्यों देते हैं ढ़लते सूर्य को अर्घ्य.
sun set kuchhnaya
  • सुबह, दोपहर और शाम तीन समय सूर्य देव विशेष रूप से प्रभावी होते हैं.
  • सुबह के वक्त सूर्य की आराधना से सेहत बेहतर होती है.
  • दोपहर में सूर्य की आराधना से नाम और यश बढ़ता है.
  • शाम के समय सूर्य की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है.
  • शाम के समय सूर्य अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं. इसलिए प्रत्यूषा को अर्घ्य देना तुरंत लाभ देता है.
  • जो डूबते सूर्य की उपासना करते हैं ,वो उगते सूर्य की उपासना भी जरूर करें
ज्योतिष के जानकारों की मानें तो अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा इंसानी जिंदगी हर तरह की परेशानी दूर करने की शक्ति रखती है. फिर समस्या सेहत से जुड़ी हो या निजी जिंदगी से. तो आइए देखते हैं कि ढ़लते सूर्य को अर्घ्य देकर आप कौन –कौन सी मुसीबतों से छुटकारा पा सकते हैं.
  • जो लोग बिना कारण मुकदमे में फंस गए हों.
  • जिन लोगों का कोई काम सरकारी विभाग में अटका हो.
  • जिन लोगों की आंखों की रौशनी घट रही हो.
  • जिन लोगों को पेट की समस्या लगातार बनी रहती हो.
  • जो विद्यार्थी बार-बार परीक्षा में असफल हो रहे हों
छठ मईया की महिमा:
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था का पर्व छठ पूजा मनाया जाता है. नहाय खाय के साथ ही लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो जाती है. चार दिन तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है. इसके महत्व का इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इसमें किसी गलती के लिए कोई जगह नहीं होती. इसलिए शुद्धता और सफाई के साथ तन और मन से भी इस पर्व में जबरदस्त शुद्धता का ख्याल रखा जाता है.
महाभारत से है छठ का नाता:
छठ व्रत के सम्बन्ध में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं; उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गये, तब श्री कृष्ण द्वारा बताये जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उनकी मनोकामनाएँ पूरी हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिला। लोक परम्परा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मइया का सम्बन्ध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी। छठ पर्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो षष्ठी तिथि (छठ) को एक विशेष खगोलीय परिवर्तन होता है, इस समय सूर्य की पराबैगनी किरणें (Ultra Violet Rays) पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं इस कारण इसके सम्भावित कुप्रभावों से मानव की यथासम्भव रक्षा करने का सामर्थ्य प्राप्त होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *